• जीवन में खुशी और असंतोष के बीच संघर्ष:
“अंततः, खुशी का असली राज़ केवल कमाई में नहीं, बल्कि संतोष में है” -दिलीप
कुछ दिनों पहले मैंने एक पोल किया और अपने इंस्टाग्राम कम्युनिटी से एक सवाल पूछा कि "क्या वे अपने जीवन में खुश हैं?" लगभग 70% लोगों का जवाब था कि वे अपने हालिया जीवन से खुश नहीं हैं। कई लोगों ने यह भी कहा कि उनका यह जीवन उन्हें पसंद नहीं है या वे जिस तरह का जीवन जी रहे हैं, वह उनकी अपेक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है। दूसरी ओर, 30% लोगों ने बताया कि वे अपने जीवन में खुश हैं।
ध्यान देने वाली बात यह है कि जिन्होंने कहा कि वे खुश नहीं हैं, उन्होंने अपने असंतोष को विस्तार से व्यक्त किया। लेकिन आखिर ऐसा क्यों है कि अधिकांश लोग खुश नहीं हैं? कुछ समय पहले तक मैं भी खुद को इसी श्रेणी में पाता था, लेकिन अब मैं उन 30% लोगों में शामिल हूँ जो अपने जीवन में संतुष्ट हैं। हालांकि, मैं भी असीमित खुश नहीं हूँ, फिर भी अपने जीवन में एक हद तक संतोष का अनुभव करता हूँ।
• खुशी की कमी का प्रमुख कारण - 'पैसे कमाने की कामना'
हमारे जीवन में खुशी की कमी का एक मुख्य कारण मुझे "पैसे कमाने की कामना" प्रतीत होता है। यह एक ऐसी चाहत है जिसने अमीर और गरीब, विद्यार्थी और परीक्षार्थी, सभी को प्रभावित किया है। अमीर अधिक धन कमाने के लिए चिंतित हैं, जबकि गरीब अपनी बुनियादी आवश्यकताओं - रोटी, कपड़ा, मकान और अन्य आवश्यकताओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। विद्यार्थी नौकरी की तलाश में पढ़ाई कर रहे हैं ताकि वे आर्थिक रूप से सुरक्षित हो सकें। इस प्रकार, लगभग हर कोई पैसे के लिए किसी न किसी रूप में संघर्ष कर रहा है।
• क्या धन ही खुशी का माप है?
एक प्रसिद्ध अध्ययन, जिसे National Academy of Sciences में प्रकाशित किया गया, यह बताता है कि धन और खुशी के बीच एक संबंध होता है, लेकिन यह संबंध केवल एक हद तक ही खुशी को बढ़ा सकता है। अमेरिका में हुए इस अध्ययन के अनुसार, वार्षिक आय के एक विशेष स्तर ($75,000) तक पहुँचने पर लोग अधिक खुशी का अनुभव करते हैं, लेकिन उससे ऊपर आय बढ़ने से उनकी खुशियों में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं आता। इससे पता चलता है कि आर्थिक स्थिरता तक पहुँचने के बाद भी केवल अधिक धन कमाने से खुशी की गारंटी नहीं है।
• सिमित संसाधनों में भी खुशी की खोज
हमारे पास सीमित संसाधन हो सकते हैं, फिर भी हम खुश रह सकते हैं। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की एक और रिसर्च से यह पता चलता है कि जीवन में खुश रहने के लिए हमारे रिश्ते, स्वास्थ्य और मानसिक शांति का महत्व धन से कहीं अधिक है। यह रिसर्च बताती है कि खुशहाल जीवन का असली राज़ हमारे सामाजिक संबंधों में निहित है, न कि हमारे बैंक बैलेंस में।
आप बिना अधिक खर्च किए देश घूम सकते हैं, नए लोगों से मिल सकते हैं, किताबें पढ़ सकते हैं, और अपने मनपसंद कार्यों को कर सकते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, यात्रा, अनुभव और सामाजिक संपर्कों पर खर्च करने वाले लोग भौतिक वस्तुओं पर खर्च करने वालों की तुलना में अधिक संतुष्ट रहते हैं। इसलिए, सिर्फ पैसे कमाने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, हमें उस धन से संतुष्टि प्राप्त करने की कोशिश करनी चाहिए जो हमारे पास पहले से है।
• एक संतुलित जीवनशैली का महत्व
मनोविज्ञान के विशेषज्ञ बताते हैं कि व्यक्ति के लिए मानसिक और शारीरिक संतुलन बनाए रखना अत्यधिक आवश्यक है। कई बार हम करियर और धन के पीछे भागते हुए अपनी सेहत और रिश्तों को नजरअंदाज कर देते हैं, जो अंततः हमारी खुशी को प्रभावित करता है। इसके बजाय, यदि हम अपने जीवन में काम और जीवन के बीच संतुलन बनाए रखते हैं, तो हम ज्यादा सुखी और तनावमुक्त महसूस कर सकते हैं।
• आभार और संतोष का अभ्यास
रिसर्च बताती है कि रोज़ आभार प्रकट करना और जो हमारे पास है, उस पर संतोष व्यक्त करना, हमारे मानसिक स्वास्थ्य को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। एक University of California, Berkeley के अध्ययन में पाया गया कि जो लोग रोजाना आभार जताते हैं, वे अधिक संतुष्ट और मानसिक रूप से स्वस्थ महसूस करते हैं।
यह समझना भी आवश्यक है कि हमारे पास जितने भी संसाधन और अनुभव हैं, उनमें से किसी न किसी रूप में हमें खुशी प्राप्त करने का अवसर मिल सकता है। खुश रहने के लिए जरूरी है कि हम अपने उपलब्ध संसाधनों का आभार जताएँ और उनमें संतोष ढूंढें।
• संतोषऔर खुशी का रिश्ता
सच्चाई यह है कि पैसा तभी खुशी दे सकता है जब व्यक्ति उसमें संतोष ढूंढ सके। चाहे हमारे पास कितना भी धन क्यों न हो, अगर हम उसमें संतोष नहीं पा सकते तो हमारी खुशी अधूरी ही रहेगी। यही कारण है कि हमें यह सोचना चाहिए कि हम इतना धन क्यों कमाना चाहते हैं।
इसके अगले भाग में हम बात करेंगे कि पैसे के अलावा ओर क्या चीज़ें है जिनके कारण हम खुश नहीं है। इसलिए सब्सक्राइब कर लीजिए।

