दुनिया की दौड़ में कौन नहीं दौड़ रहा है। हर कोई यहां इस दौड़ में शामिल है। लेकिन इन अरबों लोगों में से मुश्किल से शायद एक प्रतिशत लोग ही सफल हो पाते है। उन्हें हर कोई जानता है, उन्हें सभी अखबार, टीवी इंटरव्यू, पॉडकास्ट में जगह मिलती है।लेकिन कभी सोचा है कि जो निन्यानवे प्रतिशत लोग असफल हुए है।वो कहां गायब हो जाते है। उन्हें दुनिया भूल जाती है,लेकिन क्या उनसे नहीं सीखा जा सकता है? मेहनत तो उन्होंने भी उतनी ही की थी। लेकिन सिर्फ असफल होने से लोग उन्हें नाकाम समझते है। हां कुछ उपवाद जरूर हो सकते है। वो असफल लोग ही बता सकते है कि कहां गलती नहीं करनी है। जो उन्होंने की थी। उन्हीं 99 प्रतिशत लोग में मैं भी शामिल हूं। ध्यान रहे मैं 19 साल की उम्र में यह कह रहा हु कि मैं असफल हूं। शायद भविष्य में मैं भी 99 प्रतिशत लोगों से सीख कर 1 प्रतिशत में शामिल हो जाऊं। इस बात की सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है। क्योंकि भविष्य अनिश्चित है। आप 19 साल के एक नौजवान, बुद्धि से बच्चे को पढ़ रहे है। अगर आप यहां तक पहुंच गए है तो आगे भी इसे पूरा पढ़िए और अगर आप इसे यहीं छोड़ना चाहते है तो एकदम छोड़ दीजिए।क्योंकि दुनिया सिर्फ सफल लोगों को देखना,पढ़ना चाहती है।

मैं अभी तक अपने स्कूल में कभी भी किसी भी विषय में फैल नहीं हुआ हूं।

मतलब मैं असफल नहीं हूं?

नहीं मैं असफल हूं।

क्योंकि मैं जीवन में कई बार फैल हुआ हूं। सिर्फ स्कूल को छोड़ कर ओर एक बार तो स्कूल में भी फैल हुआ हूं। या यूं कहना चाहिए कि कई बार। ये मैं अंकों की बात नहीं कर रहा हु। मै बात कर रहा हूं जीवन के निर्णय लेने में असफल होने की। मैं असफल हुआ हु अपनी रुचि का विषय चुनने में,मै असफल हुआ हु सिर्फ पढ़ाई पर ध्यान देने ओर अन्य जरूरी चीज़ों को न करने में, मैं असफल हुआ हु शिक्षकों का आदर करने में सूची जरूर ही बहुत लंबी हो सकती है। खैर स्कूल के बाद मैं असफल हुआ हूं। भविष्य चुनने में। एक बहुत ही मज़ेदार कहानी है। मेरे 12वी पास करने के बाद से अब तक की। मैं फिर कहा रहा हूं। अगर आपको असफलता पसंद नहीं तो इसे अभी छोड़ दीजिए। बाहरवी के मध्य आते आते कोरोना बढ़ गया था। विद्यालय बंद हो गए थे। हमे मजे आ गए थे। आखिर स्कूल में पढ़ाई किसको पसंद आती है। कोरोना लगातार बढ़ता रहा फिर हमे 10वीं के अनुसार प्रतिशत दे दिए। मेरे 10वीं में ठीक बने थे। तो जाहिर सी बात है 12वीं में भी अच्छे ही बने। लेकिन समस्या यहीं है कि आपके अच्छे नंबर आए। अगर आपके अच्छे नंबर आते है या आप कक्षा के अव्व्ल आने वाले विद्यार्थियों में से है तो समाज,परिवार की उम्मीदें आपसे बढ़ जाती है। ओर अगर किसी की उम्मीद है तो फिर आप भी खरा उतरने की पुरजोर कोशिश करते है। फिर लग गया मैं भी बढ़े सपने देखने लेकिन सपने सिर्फ देखने से कुछ नहीं होता सपने को पाने के लिए कोशिश भी उतनी ही शिद्दत से करनी चाहिए जितनी शिद्दत से आप सपना देखते है। मैंने किसी कॉलेज में दाखिला नहीं लिया क्योंकि मैं यह जान चुका था कि अपने यहां से कोई स्नातक कोर्स करने से कोई अवसर नहीं मिलने वाला । मैने 12वीं जीव विज्ञान, फ़ौतिकी,रसायन से की थी तो सोचा कि मेडिकल क्षेत्र में ही जाया जाए। डॉक्टर कैसे बनना है इसकी जानकारी नहीं थी । न ही मैं यह जान पाया था कि मेरा इकिगाई क्या है। लेकिन फिर भी मैंने नर्सिंग के लिए कॉलेज में दाखिला लेने की कोशिश की लेकिन देर से जागने के कारण सभी कॉलेजों की सीटें पूर्ण हो गई थी। अंत में कोशिशों के बावजूद मुझे कही एक भी सीट नहीं मिली। ओर 12वीं के बाद एक बरस मैं कुछ नहीं कर पाया। साल में मध्य में प्रधानमंत्री की योजना के तहत मुझे नर्सिंग स्टाफ का काम सीखने और करने का अवसर मिला। तब से मेडिकल क्षेत्र में रुचि और बढ़ गई। फिर इसके बारे में इंटरनेट से अधिक जानकारी प्राप्त की ओर मुझे समझ आया कि मुझे प्रवेश परीक्षा यानी नीट की तैयारी करनी चाहिए । लेकिन अगला सत्र शुरू हो गया था तो मैने नर्सिंग के एक महाविद्यालय में दाखिला ले लिया। साथ में upsc की तैयारी शुरू करी। क्योंकि मुझे 12वीं से ही इस परीक्षा की तैयारी करनी थी । इसलिए नहीं कि मुझे कलेक्टर या पुलिस बनना था। इसलिए की यह भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है। तो मैने सोचा इसे ही दिया जाएगा । लेकिन कुलजमा 2 महीने की तैयारी में मुझे समझ आ गया कि इस तरीके से ये तैयारी होगी नहीं। मैने छोड़ दी । सपना नहीं छोड़ा सिर्फ अभी के लिए तैयारी छोड़ दी । ओर मैने कुछ कम कठिन परीक्षा की तैयारी शुरू की अपने शहर की लाइब्रेरी से वहीं नीट की एक साल दिन रात करके पढ़ाई करके भी मेरिट नंबर तक पहुंच नहीं पाया। मैं फिर दो बार असफल हुआ। मैने मन बना लिया और तैयारी के लिए अपने शहर(घर) से दूर जाने का सोचा और मैं अपने शहर से दूर एक शहर में पहुंच गया। इन सभी समय में कई बार हताश हुआ। कई बार असफल हुआ। लेकिन तैयारी जारी रखी। एक कोचिंग भी करी। लेकिन फिर वहीं अपने सपने तक पहुंचने इतने नंबर नहीं ले पाया । मुझे अब तक अपना इकिगाई नहीं मालूम। फिर असफल हुआ। मुझे वीडियो बनाने,फोटो एडिट करने,ओर इस तरह के काम जो इंटरनेट पर प्रस्तुत किए जाते है पसंद थे । मैने 12वीं में अपना यूट्यूब चैनल भी शुरू किया था। जो कि यूं समझ लीजिए कि असफल ही रहा । कुछ जरूरी वीडियो के कारण मेरा चैनल जल्दी चला लेकिन मुझे वीडियो बनाना अच्छा लगता था । इसलिए मैं वीडियो डालता था 10,11, 12वीं के विद्यार्थियों के लिए। मुझे यह कतई अंदाजा नहीं था कि इससे पैसे भी कमाए जा सकते है। मैने उसे एक साल तक किया और कुछ 11000 के आस पास का परिवार उस चैनल पर हो गया था। अभी मैं सिर्फ इसलिए कर रहा था कि मुझे काम पसन्द है। एक दिन मुझे एक मैसेज आता है कि आपका चैनल हम खरीदना चाहते है। मैने सोचा कि ठीक है भाई मुझे वैसे भी अब समय नहीं मिलता कुछ 200-500 रुपए मिल जाएंगे । मैने उनसे कहा ठीक है। आप ले लीजिए। उन्होंने कहा हम 8 हजार रुपए देंगे। मैं सच में हैरान था कि मैने ऐसा क्या। बना दिया है जो ये इतने पैसे देने को तैयार है। फिर मैने इंटरनेट पर इसकी जानकारी निकाली। फिर मैने उन्हें ये 9000 में बेच दिया। उसके बाद मैने फिर से चैनल शुरू किया लेकिन अब बहुत कोशिश के बाद चैनल नहीं चला । इस तरीके से मैने अभी तक 17 चैनल अलग अलग विषयों पर बनाए लेकिन नहीं सफलता मिली। फिर असफल हुआ। अंत में थक हार कर मैंने सब कुछ छोड़ दिया। समय मिलने लगा था तो सोचा कुछ पढ़ लिया जाए। तो सबसे पहले मैने दो किताब ऑर्डर की पहली एटॉमिक हैबिट(Atomic Habit),दूसरी पैसों का मनोविज्ञान(The Psycology of Money) इन्हें पढ़ा कुछ ज्यादा समझ नहीं आया । एक दिन इसे ही इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट दिखी। एटॉमिक हैबिट किताब की मैने फिर उस पेज को देखा । वहां कई अच्छी अच्छी किताबों की पोस्ट दिखी। मैने सोचा मैं भी इस तरीके से हिंदी की किताबों को अपलोड करना शुरू करता हूं। पढ़ भी लूंगा इस बहाने फिर मैने इंस्टाग्राम पर अपने ही अकाउंट पर अपलोड करना शुरू किया । समय के साथ आगे बढ़ता गया और जानकारी के अनुसार अपने कंटेंट को बदलता रहा । महज़ 10 महीने में मैने 30 हज़ार फॉलोवर हासिल किए। कई किताबें पढ़ी,कई बौद्धिक लोगों से बातचीत हुई। मैंने इस बीच 3 व्यवसाय शुरू किए । लेकिन असफलता ही हाथ लगी। अभी मेरे पास इंस्टाग्राम पर तीन किताबों से सम्बंधित पेज है जहां कुल 150k माने डेढ़ लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए है। मुझे लिखने का शौक पढ़ने के साथ ही हो गया था । तब से ही लेख ,कविता और भी अन्य कुछ न कुछ लिखता रहता हूं। ये थी मेरी इतनी असफलता से भरी हुई कहानी। अब आप निर्णय ले सकते है कि मुझे ओर भी आगे पढ़ते रहना है। या आप मुझे अब कभी नहीं पढ़ेंगे । इस पत्र में सिर्फ शुरुआत हुई है। आगे यहां जीवन से जुड़े सवालों के हल देने की कोशिश करूंगा अपने अनुभव से । अगर आपका भी कोई सवाल हो तो आप जिस भी तरीके से मुझसे जुड़े हुए है। मुझे संदेश भेज देवें अपने सवाल के साथ। कुछ गलती हुई हो तो माफ कीजिए पहला पत्र है। आप यहां तक अगर पढ़ चुके के तो आपको तहेदिल से धन्यवाद 🌻

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